TERA NAAM ISHQ

AJAY SINGH RANA
Hindi Books

Availability: in-stock

Price: र 250.00

Grade 
Preeti agyat
12/10/2018

Review by Rao

तेरा नाम इश्क़: यह प्रेम ही तो है ....जो अंत तक जीवित रहता है।- प्रीति '

'तेरा नाम इश्क़'....... अजय सिंह राणा 'असर' द्वारा लिखित यह उपन्यास सामान्य प्रेम कहानियों से इतर एक नए कलेवर के साथ दस्तक़ देता है। जीवन के तमाम भावनात्मक बिंदुओं को स्पर्श करता हुआ कथानक प्रारम्भ में पात्रों की मनःस्थिति समझने में थोड़ी उलझन भले ही देता है पर उसके बाद की कहानी बहती नदिया की धार सरीख़ी कलकल कर बह उठती है। संभवतः इस उपन्यास में समाहित विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों और पात्रों का उनके जीवन पर गहन प्रभाव ही विषय की व्यापकता और इस विस्तार की मांग करता है।
'तेरा नाम इश्क़' उपन्यास, इश्क़ के अलावा भी कई आवश्यक विषयों पर संवाद करता है लेकिन जब नाम इश्क़ है तो सर्वप्रथम इंसानी इश्क़ की ही बात करते हैं जिसमें इसके पात्र प्रेम की अनजान, अबूझी राहों की हर दुश्वारियों से होकर गुज़रते हैं। क़रीब होते हुए भी दूरी का अहसास, पाते हुए भी सब कुछ खो देने की कहानी कहता यह इश्क़ मित्रता की मजबूत डोर को भी साथ थामे चलता है। हृदय आश्वस्त हो जाता है और वह डोर जिसके सिरे प्रारम्भ में कुछ छूटे-टूटे हुए से लगते हैं, धीरे-धीरे स्वतः इस प्रकार जुड़ने लगते हैं जैसे कि किसी कुशल कारीग़र ने आहिस्ता से सभी मोतियों को एक साथ पिरो दिया हो। साहिल- जस्सी, आशीष- नेहा, अरमान-आशीष, आलिया-सारिका की दोस्ती कॉलेज के 'सीक्रेट ख़बरी बैंक' के दिनों की याद दिलाती है जहाँ अपनी छोटी-सी दुनिया के सारे दुःख और सुख का खज़ाना जमा होता रहता है। यहाँ मित्र अग़र मुसीबत पैदा करते हैं तो उससे निकालने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होती है। ये हर समय सहायता के लिए तैयार रहते हैं और उस पर यदि इश्क़ का मामला हो तो इन पर आँखें मूँद बेझिझक भरोसा किया जा सकता है। पर जहाँ प्रेम हो, वहाँ ईर्ष्या न हो यह तो संभव ही नहीं! यद्यपि यह जलन किसी अपने को खो जाने के भय से उत्पन्न होती है लेकिन परिस्थिति के अनुकूल स्वयं को ढाल लेना भी इसे ख़ूब आता है। प्रेम पाने का ही नहीं खोने का भी नाम है और हम जिससे प्रेम करते हैं उसकी ख़ुशी में ही अपनी हँसी को ढूँढ निकालना भी प्रेम का ही सुलझा हुआ रूप है जिसे आशीष और आलिया के परस्पर और नेहा के साथ रिश्ते के माध्यम से अत्यधिक व्यावहारिक तरीके से स्पष्ट किया गया है।
प्रेम के परिदृश्य में रचा-बसा यह उपन्यास कई पारिवारिक मुद्दों को भी बेहतरीन तरीके से उभारता चलता है। अपने अधूरे स्वप्न को पूर्ण करने के प्रयास में माता-पिता कैसे अपने बच्चों की उम्मीदों और इच्छाओं पर पानी फ़ेर देते हैं या कि उनका अतिव्यस्त जीवन उन्हें अपने परिवार से कितना दूर कर देता है; समाज का यह पहलू भी इसमें संक्षिप्त पर सटीक रूप से दर्शाया गया है।

कॉलेज कैंपस और उससे जुड़े कई प्रसंग इतने सजीव हो उठे हैं कि यह तय ही हो जाता है कि लेखक ने स्वयं इन शहरों का गहरा अध्ययन किया है। चंडीगढ़ शहर का इतिहास, यहाँ की सुखना लेक की ख़ूबसूरती, रॉक गार्डन और यूनिवर्सिटी का विवरण कुछ इस तरह किया गया है कि यह शहर एक चलचित्र की तरह साथ चलता है। इसे लेखक का इस शहर के प्रति असीम स्नेह ही माना जा सकता है जो कि मुख्य पात्रों द्वारा व्यक्त किया गया है। मुंबई, जयपुर, कानपुर, दिल्ली, मंडी के बारे में पढ़ते हुए यह विश्वास हो जाता है कि लेखक ने यहाँ की भौगोलिक स्थितियों, इतिहास एवं मुख्य स्थलों के बारे में पर्याप्त शोध किया है यह उनका लेखन के प्रति ईमानदारी और समर्पण भाव दर्शाता है। यही कारण है कि पढ़ते समय सारी घटनाएँ और पात्र सहज, स्वाभाविक लगते हैं। दिल्ली का पहाड़गंज स्टेशन, मंडी की व्यास नदी, पुल, कानपुर के ठग्गू के लडडू....ऐसे दसियों उदाहरण इस उपन्यास में मिल जायेंगे। भाषा में बनावटीपन की कोई मिलावट नहीं, ठीक वैसी ही जैसी कि इस उम्र के शिक्षित, समझदार युवाओं की हुआ करती है तभी तो बात-बात में उनका फ़िल्मी डायलॉग मारना और निरर्थक ज्ञान बघारना भी एक पल को अखरता नहीं।

यह उपन्यास वर्तमान समय में धर्म के दुरुपयोग, दिग्भ्रमित युवा एवं स्वार्थ से वशीभूत राजनीतिक साँठगाँठ की ओर भी इंगित करता चलता है। इसमें कश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों से शुरू होकर घाटी में बुरी तरह जड़ें जमाए आतंकवाद और इससे जुड़ी समस्याओं का बेहद भावुकता एवं संवेदनशीलता के साथ चित्रण किया गया है। बंदूकों के साये में तालीम, कश्मीर की आम जनता की बेबसी और आक्रोश; दुःख की सैकड़ों कहानियों के पृष्ठ पलट देता है। 1984 के दंगों का ज़िक्र भी जैसे पुराने ज़ख्मों को उघाड़कर रख देता है। सच भी है, बम कहीं भी फटे, शहर कोई भी हो; पीड़ा आम इंसानों के हिस्से ही आती है तथा अपनों को सदा के लिए खो देने का दर्द भी उम्र भर उसे ही झेलना होता है। सरकारें आश्वासन देती हैं और इंसानी जान की क़ीमत का मुआवज़ा भरने का हुक़्म भी; लेकिन दर्द को समूल नष्ट करने के इरादे कभी मजबूत नज़र नहीं आते!

'तेरा नाम इश्क़' में प्रेम के कई सुनहरे अध्याय साथ खुलते हैं। इसमें अपने देश, अपने वतन के प्रति मर मिटने की भावना लिए उफनता, लहराता प्रेम है। माँ और बच्चों के मध्य का स्वाभाविक प्रेम है, मित्रों का टूटकर किया जाने वाला और दोस्ती के नाम सब कुछ क़ुर्बान कर देने वाला प्रेम भी मौजूद है। पर इन सब पक्षों को साथ लेते हुए मूलतः यह साहिल और नेहा के पवित्र प्रेम की किस्सागोई है। ऐसा प्रेम, जो आजीवन प्रतीक्षा की चौखट पर उम्मीद लिए खड़ा रहा, ऐसा प्रेम जिसकी आँखें अपने प्यार को तलाशती रहीं, ऐसा प्रेम जो क्षण भर को साथ आया भी तो एक क़दम तक साथ चल न सका, ऐसा प्रेम जिसकी परिणिति पीड़ादायी एवं दुःखद है और हम जैसे 'सुखांत' की उम्मीद लिए पाठकों को यह अंत बेहद और बहुत देर तक उदास कर जाता है। पर जीवन का सच भी शायद यही है.....!

पर फिर भी इसकी ख़ूबसूरती यही कि हमारे-आपके ख़त्म हो जाने के बाद भी, यह प्रेम ही तो है ....जो अंत तक जीवित रहता है। कभी दिलों में, तो कभी किस्से-कहानियों में। तभी तो -
"टूटा हुआ आदमी
सपने टूट जाने पर भी
नहीं हारता
टूटकर करता है प्रेम
क़तरा-क़तरा बिखरता है"
-प्रीति 'अज्ञात'

    Grade 
    Ajay Singh Rana A
    22/04/2018

    Tera Naam Ishq

    Review : Tera Naam Ishq by Neha Sharma

    "A thing of beauty is a joy forever'
    "Tera Naam Ishq. ... A beautifull and unputdownable novel"
    The title of each and every episode is a beautiful poem in itself.We feel tempted to take a pause and reflect on the thought provoking titles such as "kya kisi Ko pa Lena he Prem hai?''
    Further it beautifully depicts how small and helpless a man can be in front of circumstances! As if all these events happen to surprise us, to shock us, to confuse us.
    "No man is island".. Everyone craves for human company but how lonely these characters are despite being in the middle of most vibrant society. I feel one of the major themes of this novel is the plight of the lonely heart that we carry sometimes. In this novel Nature has been described in such detail it feels as if it is one of the characters. Be it the nature of Kashmir, Mandi, Chandigarh..The vast mountains stand witness to everything. One of the most impressive and striking features of this novel is the songs and verses. It is enjoyable and pleasant. The author has written this novel with utmost simplicity and sincerity. my best wishes for the author.
    A beautifull and unputdownable novel written by an able, and praiseworthy novelist Mr. Ajay Singh Rana. My heartiest congratulations to him for having written and presented to the readers an impressive plot and unforgettable characters.The very first chapter captures our attention and keeps us engrossed and interested till the story is over.This beautifull novel effectively and critically analyses the most powerful human emotions and the role of unpredictable destiny in extracting all shades of them.
    I hope to see Me Ajay Singh Rana write and present more novels for the sheer delight of readers..
    Best wishes..

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